Sunday, 12 April 2015

Wall Paper Modern Art


                                                  Wall  Paper Design

Monday, 21 July 2014

इश्क़ विश्क और प्याज़ के पकोड़े !



मैं उससे पहली बार ऑफिस से घर लौटे हुवे, डेल्ही मेट्रो ट्रैन में मिला था I शाम का टाइम था, यही कोई 6:30 बज रहे होंगे I  ट्रैन हमेशा की तरह लोगों से चका- चक भरी हुई थी और में ठीक उसके सामने वाले stanchion: यानी की ट्रैन में लगे वर्टीकल पोल को पकड़ कर खरा था I थोड़ी देर में एक शख्स जो की उसके साथ वाली सीट पे बैठा था उठ के चला गया और मुझे वो सीट मिल गयी I वो एक ग्रीटिंग कार्ड पर रेड स्केच पेन से कुछ लिख रही थी और अपने आप ही शर्माए जा रही थी I थोड़ी - थोड़ी  देर में वो कार्ड खोलती, जो भी लिखा था उसे मन ही मन पढ़ती और फिर मुस्कुराने लगती I ये सिलसिला काफी देर तक चलता रहा I मैंने सोचा अजीब लड़की है बार - बार कार्ड खोलती है, उसे पढ़ती है और फिर आखें नीची कर के अपने आप ही शर्मा जाती है I पता नई क्या लिखा था उसने उस कार्ड में और वो किसके लिए था ? कुछ भी हो पर उसका वो मुस्कुराता हुआ चेहरा , वो मासूम सी शर्माती हुई आखें.... बड़ी प्यारी लगी थी मुझे I

हाई  में विनय ! आप कुछ लिख रहीं है ? मैंने कन्वर्सेशन शुरू करने के लिए कह दिया I  

आप से मत लब ! उसने सीधा मेरी आखोँ में देखते हुवे कहा और झट से उस ग्रीटिंग को एनवलप में दाल के पोली बैग में रख दिया I उससे पहले में कुछ और पूछ पाता उसने फटाक से अपना पाली बैग और डिब्बा उठाया, सीट से उठी और नेक्स्ट स्टेशन आते ही गेट से एग्जिट हो गयी I  बाकि का मेरा घर तक का सारा सफर, उसी चेहरे को आँखों में लिए गुजरा I

हांला की में जानता था की मेरे उस चेहरे को यूं बार - बार याद करने में कोई लॉजिक नहीं है I क्योंकि, मुझे उसके बारे में कुछ भी तो पता नहीं था, कौन थी, कहाँ रहती है, यहां तक की नाम भी नहीं पता था I दुबारा कभी मिलेगी भी या नहीं, ये भी अपने आप में एक बड़ा सवाल था I और , और वो कार्ड... शायद उसका बॉय फ्रेंड हो या फिर हस्बैंड ? उसके चेहरे के एक्सप्रेशंस जब वो उस कार्ड को बार- बार पढ़ रही थी उनसे साफ़ था की वो कार्ड इन दोनों में से किसी एक के लिए तो था I कोई भी हो हस्बैंड या बॉय फ्रेंड ये क्लियर था वो मुझे फिर कहाँ मिलने वाली थी और अगर कहीं भूले - भटके मिल भी गयी तो कौन सा उसने मुझसे कोई बात करनी थी और चलो मान लो की वो मुझसे दो बातें कर भी लेती तो उससे क्या ? कौन सा हमने फ्रेंड्स बन जाना था I और चलो अगर फ्रेंड्स बन भी गयी तो, तो उसके आगे क्या , उसका तो बॉय फ्रेंड है ( आई मीन हो सकता है ) I  में अपने आप के ही बनाये इन सब ख्यालोँ से अपने दिल को दिलासा देता रहा, समझाता रहा , फिर भी इस कमबख्त ने मेरी एक ना सुनी I  घर पहुचने तक उस का चेहरा मेरे इस दिल के फोटो फ्रेम में एक दम फिट हो चूका था I


घर पहुँचते ही मेरा ध्यान वापस उस डिब्बे पे लोट आया जो की थोड़ी देर के लिए उस खूबसूरत चेहरे की वजह से हट गया था I  डिब्बे में थे प्याज़ के पकोड़े .... जी हाँ  प्याज के पकोड़े ,
 मेरे फेवरेट और जो की मम्मी ने स्पेशली मेरे लिए भिजवाये थे मेरे बर्थडे पर, मेरे दोस्त अंकुर के हाथोँ I आज मेरा बर्थडे था I  पर बर्थडे पे प्याज के पकोड़े ? एक्चुअली मुझे ये इतने पसंद थे की बचपन से मेरे हर बर्थडे पर कुछ और हो ना हो पर मुझे पकोड़े तो ज़रूर खाने होते थे I हमेशा की तरह मम्मी इस बार भी इन्हे बनाना नहीं भूली थी I में काम की वजह से दिल्ली रहता था और मम्मी और पापा बहादुरगढ़ में रहते थे I अंकुर मेरे कॉलेज का दोस्त था और पड़ोसी भी I  वो किसी काम से दिल्ली आया था तो मम्मी ने उसके हाथ पकोड़े भेज दिए इस बात का पूरा ध्यान रखते हुवे की दो - ढाई घंटे में वो मुझे मिल भी जाएंगे और सर्दी के मौसम में उनके बिगड़ने का चांस भी नहीं था I मम्मी ने एक नोट भी भेजा था जिस में लिखा था घर जाते साथ ही ओवन में गरम कर के खा लेना I अंकुर 5:00 बजे तक पकोड़ों का डिब्बा देकर चला गया था I ऑफिस ऑफ होने में अभी एक घंटा था पर कन्ट्रल कहाँ होना था जब प्याज़ के पकोड़े सामने हों I अपने दूसरे कलीग्स की नज़रोँ से बचाते हुवे मैंने धीरे से डिब्बा खोला , एक पकोड़ा टेस्ट किया और वापिस से डिब्बा बंद कर दिया I दिनों बाद मम्मी के हाथ का पकोड़ा खा के मज़ा गया I और मन हुवा सारे अभी चट कर जाऊं I पर अगले ही पल मैंने अपने आप को संभाला ! घर पे आराम से ओवन में गरम कर के , रजाई में बेथ के गरम चाय के साथ पकोड़ों का मज़ा लूँगा I अगर बाकि सब के सामने डिब्बा खोलता तो उनकी कु दृष्टि पकोड़ों पे पढ़नी ते थी और अगर ऐसा होता तो घर तक एक भी नहीं बचना था ये भी पका था I


मैंने फटाफट कपड़े चेंज किये, हाथ मु धोया और डिब्बा उठा के किचन की और तेज़ी से अपने कदम बराए I  जैसे ही पकोड़े गरम करने के लिए डिब्बा खोला तो ये क्या मेरे तो होश उर गए, कुछ समझ नहीं आया ये हुवा क्या ? मेरे प्याज के प्यारे पकोड़े उसमें नहीं थे I पकोड़े कहाँ गए मेरा दिमाग घूम गया, और -  और ये क्या है इसमें ? उस में था एक चॉकलेट केक जिस पे वाइट क्रीम से लिखा थाहैप्पी बर्थडे टु माय लव ‘ I
केक घर का बना लग रहा था I मैंने अपने दिमाग के घोड़े दोराय,रिवाइंड डायरेक्शन में ! तो रियलाइज  हुवा मेरे पकोड़ों का डिब्बा एक्सचेंज हो गया था उसी लड़की  से जिस का चेहरा अब भूले भी भुलाया नहीं जा सकता था I ये सारा कन्फूज़न सेम कलर और टाइप के डिब्बे  की वझे से हुवा I मम्मी किसी और डिब्बे में पकोड़े नहीं भिजवा सकती थी ? या उसका डिब्बा किसी और कलर का होता ? जो भी हो पकोड़े तो अब जा चुके थेऔर वापिस भी नहीं मिलने थे I   

कम से कम डिब्बा खाली तो नहीं है विनय बाबू , केक इस आल्सो नोट बैड ऑप्शन ! और इतिफाक से आज तेरा बर्थडे भी है I वैसे भी तेरे प्यारे पकोड़े जिसके पास गए हैं वो कोई और थोड़ी है I इस बार मेरे दिल ने मुझे दिलासा दिया I जहाँ मेरा दिल मुझे इस बात पे संतोष करने को कह रहा था वही मेरा दिमाग बार - बार  मुझे प्रैक्टिकल होने के लिए मजबूर कर रहा था I  क्यों की केक पे तो साफ साफ लिखा ही था 'टु माय लव ’ I
दिल और दिमाग की जिदों - जेहद में मैंने केक टेस्ट किया I मुझे केक ओके ओके लगा I

अगले दिन वो हुवा मुझे जिसकी बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी I वही शर्मीली सी आँखों वाली लड़की जिसके लिए ये दिल अब तक कायल हो चूका था मुझे फिर से ट्रैन में मिल गयी I मुझे देखते साथ ही दूर से हाथ वेव किया I मैं ! मैंने अपनी और इशारा करके पूछा तो उसने हाँ में हल्का सा सर हिला दिया I अंदर ही अंदर बहुत खुश ,में बाहर से कन्फ्यूज्ड का सा चेहरा बना के उसकी सीट की तरफ बढ़ गया, और उसके पास जाके बेथ गया I

आज उसने लेमन कलर का कुरता जिसपे पिंक रंग के फूल थे पहना था I येलो कलर उसपे बहुत सूट कर रहा था और वो आज, कल से भी ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी I
रीना - हाई में रीना
विनय - हेलो आई एम विनय I
रीना - वो एक्चुअली कल हमारे डिब्बे गलती से एक्सचेंज हो गए थे I
विनय - हाँ शायद आप जल्दी - जल्दी में मेरा डिब्बा ले गयीं और अपना छोड़ गयीं I
रीना - शायद नहीं, यही हुवा था I  आप का डिब्बा मेरे पास गया और मेरा आप के पास  I
( मैंने हाँ में सर हेला दिया )
विनय - आप के डिब्बे में केक था, बर्थडे केक l किसका बर्थडे था ? आप को तो बिना केक के बहुत प्रॉब्लम हुई होगी l वो तो किसी स्पेशल के लिए बड़े प्यार से अपने हाथों से बनाया लग रहा था l
रीना - हाँ बनाया तो बहुत स्पेशल के लिए ही था पर एक्चुअली अच्छा ही हुआ हमारा डिब्बा एक्सचेंज हो गया l उसमें जो प्याज़ के पकोड़े थे, वाओ ! डे वर अमज़िन्गली डिलीशियस l
विनय - यू लाइक्ड देम ?
रीना - हाँ और उसे भी बहुत बहुत पसंद आये l
विनय - उसेेेे ?
रीना - वो मेरा बॉय फ्रेंड है l मैं उसे बर्थडे पे केक का सरप्राइज देना चाहती थी पर पकोड़ों का दे दिया एंड ही रियली लव्ड देम l एक्चुअली जब मैंने डिब्बा में पकोड़े देखे तो रेआलाइज़ किया डिब्बा बदल गया है l उसने देखते साथ कहा तुमने बनाएं हैं तो मैंने भी कह दिया हाँ मैंने बनाये हैं ! आई नो मुझे ऐसे झूठ नहीं बोलना चाहिए था पर क्या करू कुछ सिचुएशन ही ऐसी थी , और उसे बुरा लगे इसलिए मैंने बोल दिया l

ये सुन के उसके लिए मेरे अंदर का प्यार जो की पहले उछल - उछल के बाहर आना चाहता था धम से बेथ गया l  आप सबको जलने की स्मेल रही है ?आएगी ही .... मेरा दिल जो जल रहा था l  अब आप धीरे - धीरे मुस्कुरा भी रहे होंगे l पर मुझे तो उसपे थोड़ा थोड़ गुस्सा रहा था l इस के लिए नहीं की माँ के हाथ के पकोड़ों को खुद बनाया बता दिया , बल्कि इसलिए की वो पकोड़े जो मेरा बर्थडे गिफ्ट थे वो उसके बॉय फ्रेंड के पेट में गए l उसका बॉय फ्रेंड हो सकता है इसका अंदाजा तो था मुझे पहले से पर फिर भी अब उसके मु से खुद सुन्ना तो ऐसा था जैसे सर्दी में आप को सुबह- सुबह की पहली धुप का इंतज़ार हो पर अचानक से तेज बारिश हो जाए l

रीना - आप मुझे पकोड़ों की रेसिपी देंगे l अब की बार में खुद बनाऊँगी l
विनय - क्यों आप को बनाने नहीं आते मैंने कुछ उखड़ी आवाज़ में कहा l
रीना -  आतें तो हैं पर इतने टेस्टी वाले नहीं l  उनका तो मज़ा ही कुछ और था l
मैंने इतने बढ़िया पकोड़े पहले कभी नहीं खाए थे l  (पॉज ) ऐसा मेरे बॉय फ्रेंड ने कहा l
विनय - और तुमने ?
रीना - मैंने भी नहीं खाए l  प्लीज प्लीज बताइये कैसे बनाये आपने l
(उसकी प्लीज प्लीज की रिक्वेस्ट से मेरा गुसाया दिल थोड़ा पिगल्ने लगा l  मैंने कहा पकोड़े मैंने नहीं मम्मी ने बनाये थे )
रीना - ओह ! कोई बात नहीं आप मुझे अपने घर का एड्रेस दे दीजिये , में आंटी से घर पे के ले लूंगी l
विनय - मेरी मम्मी डेल्ही में नहीं रहती l  मम्मी पापा बहादुरगढ़ में हैं और मैं जॉब की वझे से यहाँ डेल्ही में l
रीना - तो आंटी ने इतनी दूर से स्पेशली आप के लिए पकोड़े भिजवाये l  हम्म्म ! सो वेरी केयरिंग लाइक माय BF l
विनय - या शी इस ! शी इस परफेक्ट इन कुकिंग आल्सो l  वो हर तरह का बहुत टेस्टी खाना बनती हैं l
( और सोचा इसे हर बात में अपने बॉय फ्रेंड को लाना ज़रूरी है ? )
रीना - यू नो सुमित वर्क्स फॉर रिलायंस कम्युनिकेशनस l
विनय - सुमित कौन ?
रीना - ओह्ह सॉरी मैंने नाम तो बताया ही नहीं l  माय बॉय फ्रेंड ! उसका नाम सुमित है , सुमित अरोरा ! पर में उसे प्यार से सैमी बुलाती हूँ l
( सुमित अरोरा हम्म्म्म, आज ही गूगल करके इसकी साड़ी डिटेल्स नीकालता हूँ l  कौन सी खेत की मूली है ये ? FB पे तो होगा ही मैंने अपने मन में सोचा )

रीना - क्या आप आंटी से रेसिपी लेकर मुझे दिलवा सकते हैं l
विनय - कौशिश करूंगा l
रीना - ये मेरा नंबर है , आप इस पे मुझे मिस्ड कॉल दे दीजिये मैं आपका भी सेव कर लूंगी l

इन लड़कियों को समझना बहुत मुश्किल है जहां कल मुझसे बात भी करने को राज़ी नहीं थी वही अपने आप मुझे अपना नंबर दे दिया l जो भी हो अच्छा है रेसिपी के बहाने ही सही फ़ोन नंबर तो मिल ही गया था मुझे l

मैंने घर पहुँचते ही माँ को फ़ोन किया और कहा पकोड़े बहुत अच्छे थे l कैसे बनाये थे मम्मी ?
मम्मी - कैसे बनाये थे मतलब ? तुझे क्या करना है ?
विनय - आई मीन रेसिपी, मुझे रेसिपी चाहिए थी l
मम्मी - किसलिए ?
विनय - वो एक्चुअली मेरी एक फ्रेंड है उसने भी खाए थे तो उसने बोला आंटी से रेसिपी दिलवा देना l बस इसलिए और कुछ नहीं ! मेरे ये कहने की देर थी की बस ....
तूने अपने पकोड़े शेयर किये ? फिर तो बहुत खास होगी तेरी ये दोस्त , हम्म्म्म क्या नाम है लड़की का ? खूबसूरत है ? डेल्ही में ही है , तेरे ऑफिस में ? वगैरा वगेरा क्वेस्ट्नस की बारिश शुरू हो गयी l  हर समय अब शादी करले - शादी करले और कई लड़कियों  की प्रोफाइल्स मुझे बार बार भेजने वाली मेरी मम्मी ने जब ये सुना की वो मेरी फीमेल फ्रेंड है तो वो कुछ ज़्यादा ही एक्साइट हो गयी और झट से साड़ी रेसिपी फ़ोन पे बता दी जो मैंने नोट कर ली l
मैंने मम्मी का फ़ोन रखा और अगला कॉल रीना को मिला दिया l  उसने हाई - हेलो के बियॉन्ड ज़्यादा बात तो नहीं की बस सीधा रेसिपी  भेजने को कह दिया, मैंने वो वाट्स अप्प कर दी l

अगले दिन उसने वाट्स अप्प किया - मैंने पकोड़े ट्राई किये थे , काफी अच्छे लगे सबको l
पढ़ के अच्छा लगा l
पर फिर नेक्स्ट टेक्स्ट आया -  और सैमी को भी l  विध स्माइली l

ये सुमित का चैप्टर गायब नहीं हो सकता क्या इसकी लाइफ से ? मुझे उसकी हर वो बात अच्छी लगती जिसमें उसके BF सैमी ओह सॉरी सुमित का जिक्र नहीं होता था और हर वो बुरी जिसमें होता था l  उसने मुझे बताया की वो भी जॉब की वजह से ज़्यादा बिजी रहती थी इसलिए कुकिंग बहुत अच्छे से नहीं जानती थी l पर अब वो परफेक्ट खाना बनाना सीखना चाहती थी l

अगले दिन -
रीना - क्या आप अपनी मम्मी से बेसन के लडूकैसे बनते हैं पूछ सकते हैं ?
विनय - हाँ क्यों नहीं l
मैंने मम्मी से फ़ोन पे रेसिपी ली , जो उनोहोने इस बार बिना किसी सवालो के बता भी दी l  अब वो अच्छे से जान चुकी थी की मुझे रेसिपी किसके लिए चाहिए l  फिर मैंने पहले की तरह ही उसे वाट्स अप्प कर दी I

ये रेसिपीज का सिलसिला ऐसा शुरू हुवा की दिनों तक चलता रहा l मैं उसे माँ की डिफरेंट - डिफरेंट रेसिपीज बताता रहता l वो उनहे ट्राई करती , और जैसी भी बनती अगले दिन उसका रिव्यु भी दे देती l अक्सर उनेह टेस्ट करने का मौका मुझे भी मिल ही जाता था l  अब हम काफी बातें करने लगे थे- कभी फ़ोन पे , कभी msgs के थ्रू और अक्सर मिल भी लेते थे ऑफिस से आते हुवे l पहले जो ऑफिस से वापसी का मेट्रो का लम्बा सफर बहुत बोरिंग लगता था अब वही सफर का मुझे सबसे ज्यादा इंतज़ार रहने लगा था l  वो साथ जो होती थी तब l  बस यही लगता था की ट्रैन यूं ही चलती रहे और हम दोनों बस बैठे - बैठे बात करते रहे और ये सफर कभी खत्म ही हो l अब फ़ोन पे भी घंटो बातें होने लगी थी l उसके साथ फ़ोन पे बात करते करते समय कैसे बीतता था पता ही नहीं चलता था l ज़िन्दगी काफी कलरफुल और म्यूजिकल सी लगने लगी थी l

फिर एक दिन अचानक से मेरे फ़ोन पे एक मैसेज आया -
रीना का था - मेरी शादी की डेट फिक्स हो गयी है , आज से ठीक एक महीने बाद - 6 जून 2011

आज वही तारिक है 6 जून l बस साल बदल चूका है l 2014 तीन सालो के बाद भी वो वैसी ही दिखती है जैसे वो तब दिखती थी जब मैंने उसे पहली बार मेट्रो ट्रैन में देखा था l और खाना, खाना तो अब वो ऐसा बनाती है की पूछो मत l जो खाए उंगलियां चाटता रेह्जाये l  मुझे कैसे पता ? अरे मैं तो रोज खाता हूँ उसके कोमल कोमल हाथो से l

क्या हुवा आप सब चौक गए ? ये कहानी में ट्विस्ट कैसे ? और रीना, सुमित और मेरे बीच के लव ट्रायंगल में सुमित कहाँ गया ? तो सुनिए -
दरअसल असल ज़िन्दगी में सुमित कभी एक्सिस्ट ही नहीं करता था l ये सब तो हमारी माशुका ने हमें पाने के लिए किया था l और वो इस में बखूबी कामयाब भी रही l  हम दोनों एक दूसरे को लाइक करते थे पर दोनों ही इस बात से बेखबर थे l जैसे में पहली बार में ही उनकी नज़रो से घायल हो गया था , वो भी हमें पहली नज़र में ही अपना दिल दे बैठी थी l वो तो हमें तब से फॉलो कर रही थीं जब मैंने डेल्ही में अपनी जॉब शुरू की थी l  हम दोनों का सैम बिल्डिंग में ऑफिस था पर में नादान , इस बात से बिलकुल अनजान l  वो कहतें हैं ना की प्यार में जलन, मिलने की तरप को और बड़ा देती है l  बिलकुल सही कहतें हैं l  इस इश्क़ के सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए ही ये सारा नाटक रचा गया था l  और इस में सहयोगी किरदार का अवार्ड जाता है मेरी लविंग मम्मी को ! जी हाँ वो भी श्यामिल थी इस मीठी नमकीन लव स्टोरी को अंजाम देने में l :)